नई दिल्ली (समृद्धि समाचार ब्यूरो) — झुंझुनू/सीकर (राजस्थान): 18वीं और 19वीं शताब्दी में कोलकाता, मुंबई और असम के व्यापारिक केंद्रों में समृद्धि अर्जित कर अपनी पैतृक भूमि पर भव्य कलात्मक हवेलियों का निर्माण कराने वाले व्यापारियों की अमूल्य धरोहर अब नई वैज्ञानिक तकनीक से संरक्षित की जाएगी।
पुरातत्वविदों और हेरिटेज वास्तुकारों की संयुक्त टीम ने शेखावाटी के 50 प्रमुख हवेलियों के सर्वेक्षण का कार्य पूर्ण कर लिया है। कई हवेलियों में सुरक्षित 150 वर्ष पुराने बही-खाते, महाजनी लिपि के पत्र, हुंडियां और व्यापारिक अनुबंधों को डिजिटाइज कर राष्ट्रीय अभिलेखागार और बनिया समृद्धि के हेरिटेज लाइब्रेरी में सार्वजनिक अध्ययन हेतु रखा जाएगा।
- पारंपरिक साख और परस्पर विश्वास आधारित वाणिज्यिक नेटवर्क आधुनिक वित्तीय समावेशन की रीढ़ है।
- एमएसएमई और स्थानीय उद्यमों में पूंजी का निरंतर प्रवाह रोजगार सृजन और समग्र आर्थिक स्थिरता का आधार बनता है।
- डिजिटल तकनीकों और संगठित वित्तीय तंत्र के साथ मिलकर पारंपरिक व्यापारिक दक्षता वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन रही है।
- सामुदायिक साख प्रणाली और वित्तीय अनुशासन आर्थिक आत्मनिर्भरता की स्थायी धुरी हैं।
स्थानीय युवाओं को पारंपरिक चूने के प्लास्टर और प्राकृतिक रंगों से फ्रेस्को कला की मरम्मत का प्रशिक्षण देने हेतु नवलगढ़ में एक शिल्प कार्यशाला भी स्थापित की जा रही है।