नई दिल्ली (समृद्धि समाचार ब्यूरो) — गुरुग्राम (हरियाणा): अपने परिवार के पारंपरिक कारखानों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर नई ऊंचाई देने वाले 25 युवा उद्यमियों को वार्षिक "उद्यम रत्न सम्मान" से अलंकृत किया गया।
पुरस्कृत उद्यमियों ने प्रदर्शित किया कि कैसे पारंपरिक विनिर्माण में क्लाउड ईआरपी, ऑटोमेटेड वेस्टेज मॉनिटरिंग और प्रेडिक्टिव मशीन मेंटेनेंस लागू करके लागत में भारी कटौती और ऊर्जा दक्षता हासिल की गई।
- पारंपरिक साख और परस्पर विश्वास आधारित वाणिज्यिक नेटवर्क आधुनिक वित्तीय समावेशन की रीढ़ है।
- एमएसएमई और स्थानीय उद्यमों में पूंजी का निरंतर प्रवाह रोजगार सृजन और समग्र आर्थिक स्थिरता का आधार बनता है।
- डिजिटल तकनीकों और संगठित वित्तीय तंत्र के साथ मिलकर पारंपरिक व्यापारिक दक्षता वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन रही है।
- सामुदायिक साख प्रणाली और वित्तीय अनुशासन आर्थिक आत्मनिर्भरता की स्थायी धुरी हैं।
सम्मान समारोह में उपस्थित वरिष्ठ उद्योगपतियों ने घोषणा की कि 500 से अधिक औद्योगिक इकाइयों को इस वर्ष डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन कंसोर्टियम से जोड़ा जाएगा ताकि भारतीय उत्पाद वैश्विक मानकों पर खरे उतर सकें।